मेरा सात साल के प्यार की कहानी | Love Story Of My Seven Years.

Love Story Of My Seven Years

मेरा सात साल के प्यार
मेरा सात साल के प्यार

यह कहानी मेरे सात साल के प्यार की है। आज के जमाने में लोग प्यार भी करते है लेकिन ज्यादा से ज्यादा उनका प्यार एक साल तक चलता है। उसके बाद किसी ने किसी वजह से उन दोनों में दूरिया बढ़ने लगती है और अंत में वे दोनों एक दूसरे से बिछड़ जाते है। लेकिन हमारा प्यार उन सब से अगल था। हमारा प्यार जब से शुरू हुआ था जब से लेकर लगातार सात साल तक चला। तो आप इस कहानी के अंत तक बने रहिये। यह कहानी बहुत की रोमांस से भरी हुई है।मेरा सात साल के प्यार

इस कहानी में मेरे सात साल के प्यार की बहुत सी यदि जुडी हुई है। जिसको पढ़कर आप को भी अपने प्यार की यादे तेजी हो जाएगी।

यह कहनी हमारे गांव के मंदिर से शुरू होती है। मैं हमारे गांव के मंदिर में रोज सुबह ,शाम भगवान के दर्शन के लिए जाता था। मेरा एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब मैं मंदिर ना गया हो। गांव से अधिकतर लोग या तो सुबह जाते या शाम को मंदिर जाते लेकिन मैं हर रोज दो बार मंदिर जाता है। उस समय मैंने किसी से भी प्यार नहीं किया था और ना ही किसी लड़की की तरह देखता था। हलाकि ऐसा नहीं था की मेरा किसी लड़की से प्यार करने का मन नहीं था।मेरा सात साल के प्यार

मैं सब ये चाहता था की कोई लड़की आगे से चलकर मुझसे प्यार का इजहार करे। उस समय मैं अपने से डरता था की कही मैं किसी से लड़की से कुछ बोल दू  कही मेरे पापा से न बोल दे। इसलिए मैं किसी लड़की की और देखता भी नहीं था। वैसे गांव में काफी सारी लड़किया थी उनमे  से कुछ लड़किया मुझे पसंद थी। लेकिन बात उतनी सी थी की मैं उनसे खुद आगे से ये नहीं बोल सकता था की मैं उनसे प्यार करता हु। ऐसी बात उनसे कहने से मुझे डर लगता था।मेरा सात साल के प्यार

एक दिन की बात है जब मैं सुबह -सुबह मंदिर में दर्शन के लिए गया। उस दिन मुझे एक लड़की अपने परिवार के साथ मंदिर में मिली मैं उस समय मंदिर की सीढिया  चढ़ रहा था। तब वो भी मेरे आगे की तरफ मंदिर की सीढिया चढ़ रही थी। उस समय मैं जल्दी से मंदिर की सीढिया चढ़ कर उनसे पहले मंदिर में जा पंहुचा। मंदिर गांव के एक छोटे से पहाड़ पर बना हुआ था। मैं उनसे पहले सीढिया चढ़ कर मंदिर के ऊपर चढ़कर उसे देखने लगा।मेरा सात साल के प्यार

तब वो लड़की और उसके परिवार वाले सीढिया चढ़ते हुए काफी थक गए थे। तो वे सीढ़ियों पर बैठ गए उस समय उनके साथ के बड़े बुजुर्ग भी थे। जो  सीढिया चढ़ते हुए काफी थक चुके थे। मैं उनके लिए ऊपर मंदिर से पानी लेकर गया। उस समय जब मैंने उस बड़े बुजुर्ग को पानी पिलाया तो सब ने मुझे दिल से धन्यवाद दिया। उस समय मैंने उस लड़की की आखो में देखा उसकी आखो  देखते ही मुझे उसकी आखो में मेरे लिए प्यार नजर आया।मेरा सात साल के प्यार

मै उस समय उन्हें पानी पिलाकर वहा से वापस मंदिर में आ गया। मुझे वह लड़की बहुत पसंद आ गयी थी। उसे देखते ही मुझे उसकी आखो में मेरे लिए प्यार नजर आने लगा था। मैं उसे देखने के मंदिर में बने खम्बे की किनारे पर बैठ गया। वो भी अपने परिवार के लोगो के साथ मंदिर में आ गए वहा आकर उन्होंने दर्शन किये और फिर वे भी मंदिर के एक कोने में बैठ गए। मैं भी उन्हें पास में बैठकर दे रहा था। वो लड़की भी मुझे पास बैठकर मेरी और देख रही थी।मेरा सात साल के प्यार

 

मेरा सात साल के प्यार
मेरा सात साल के प्यार

 

 

 

 

 

 

 

कुछ समय बाद वो मंदिर में घूमने के किए चली गई। मैं भी उसके पीछे पीछे मंदिर में घूमने के लिए चला गया। वो उस मंदिर को जैसे देख रही थी उसको देखकर लग रहा था की वो उस मंदिर में पहली बार आई है।हमारे गांव के वो मंदिर बहुत की पुराना था। ऐसा कहा जाता है की हमारे गांव के इस मंदिर को स्वयं भगवान ने बनाया हैं। मंदिर में हर रोज शहर से अगल अगल लोग आते थे।मैं भी उसके पीछे से उसकी सुंदरता का निखारत हुआ मैं भी पहाड़ से गांव को देख रहा था।मेरा सात साल के प्यार

वो लड़की भी मंदिर की सुंदरता को देख रही थीं। तभी उसे मंदिर की छत पर काफी सारे बंदर दिखाई दिए । वो वहा से अचानक से वहा से आई और अपने परिवार वालों के पास से जाकर वहा से बंदरों के लिए केले लेकर आई और उनको केले खिलाएं। मैं तब वहा खड़ा होकर यह सब देख रहा था। तभी उसकी नजर मेरी तरफ पड़ी उसने नजर पड़ते ही मुझे अपनी और इशारा करके अपने पास बुलाया।उसका इशारा पाते ही मैं उसके पास चला गया।मेरा सात साल के प्यार

उसने मुझे अपने पास बुलाकर कहा की मैं अभी तक अपने घर नही गया। उसके ऐसा बोलते ही मैं चुप हो गया और फिर मैने उससे कहा की यदि उसे मुझसे कोई काम है तो बता दे नही मैं घर जा रहा हु।मेरे ऐसे बोलते ही उसने कहा की मैं कहा का हु।उसके ऐसे बोलते ही मैने उसे सब समझा दिया।तब उसने कहा की उसे इस मंदिर के बारे में सब जानना है।मैंने उसके ऐसा बोलने पर उसे अपने साथ मंदिर के चारो ओर सब कुछ चीजे दिखाई उसे मंदिर के बारे में बताया।जब हमे बहुत देर हो गईं थी।मेरा सात साल के प्यार

तो मैंने उससे कहा की मुझे काफी देर हो गई है ।अब मुझे अपने घर जाना चाहिए। मेरे ऐसे बोलते ही उसने कहा की उसके पिताजी के दोस्त इस गांव में रहते है और वे इस समय गांव के सरपंच है। उसके ऐसा बोलते ही मैं बहुत कुछ हुआ क्यो की उस समय हमारे गांव के सरपंच मेरे पापा थे। मैंने ये बात उसको भी नहीं बताई की मेरे पापा की उसके पापा के दोस्त है। मुझे भी यह बात का पता उसके कहने पर ही चला था। इसने कह कर मैं वहा से कुछ दुरी पर ही गया था। मेरा सात साल के प्यार

फिर उसने मुझे पीछे से आवाज लगाकर कहा की मेरा घर कहा है। फिर मैं उससे कह दिया की सरपंच के घर के पास में मेरा घर है। इतना कह कर मैं वहा से आ गया। उस समय मैं जल्दी से अपने घर गया और मैंने यह बात अपने पापा बताई। तब पापा ने कहा की उनको भी ये बात पता नहीं है आज उनका कोई दोस्त गांव के मंदिर आने वाल है। लेकिन जब मैंने अपने पापा को उसके पुरे परिवार के बारे में बताया तब उन्होंने कहा की शहर में एक दोस्त है। मेरा सात साल के प्यार

इतनी देर में मेरे पापा के पास उनका फोन आ गया और उन्होंने कहा की वो हमारे घर आ रहे है। उनका फोन आते ही मेरे पापा ने उनके बारे में सब बताता दिया और कहा की उस लड़की के पिताजी और मेरे पिताजी एक साथ पढ़ाई करते थे। मुझे उस समय कुछ समझ नहीं आ रहा था। लेकिन मुझे उस समय एक बात की खुशी हो रही थी की वो लड़की मेरे घर आ रही थी। मुझे पापा ने उनके लिए कुछ खाने के लिए लेने के लिए भेज दिया। मेरा सात साल के प्यार

जब मैं उनके लिए कुछ लेने के लिए गया था तब तक वो लोग हमारे घर आ चुके थे। मैं धीरे से अपने घर की रसोई में गया और सामान को अंदर रख कर अपने कमरे में चला गया। वे लोग हमारी चौक में बैठे हुए थे। तब वे मेरे कमरे में से साफ -साफ नजरे आ रहे थे। मैं उस लड़कीको अपने कमरे ही खिड़की से होकर उसे देख रहा था। मेरी माँ उसे तभी अपनी बेटी की तरह वहा से बुलाकर अपने साथ रसोई में ले गयी। तभी मुझे अपने पापा ने फोन किया और मुझे उनके पास बुलाया। मेरा सात साल के प्यार

पापा के बुलाते ही मैं अपने कमरे से उनके पास चल गया। मेरे जाते ही उसके परिवार वालो ने मुझे वहा देखकर उन्होंने मेरे पिताजी से कहा की मैं उन्हें मंदिर में पहले मिल चूका हु। उन्होंने मेरे पितजी के सामने मेरी तारीफ भी करी और कहा की इसने हमें मंदिर की सीढ़ियों पर जाकर पानी भी पिलाया था। मेरी तारीफ सुनकर मेरे पिताजी बहुत खुश हुए। उस लड़की के पिताजी ने मुझे अपने पास बैठा लिया और मुझे सहलाने लगे तभी वो और मेरी माँ हमारे पास आ गयी। मेरा सात साल के प्यार

वो लड़की मुझे देखकर बहुत आश्चर्य किया। उसे पट नहीं था की यह मेरा घर मैंने उसे अपना दूसरा घर बताया था। उसने कहा की मैं उसका पीछा करते हुए यह था आ गया। तब उसके पिताजी ने उसे समझया की मैं उसका पीछा नहीं कर रहा बल्कि मेरा यही घर है। ऐसा कहते ही उसने मुझसे सॉरी बोलकर माफ़ी मांगी। कुछ समय तह हम सब एक दूसरे से बाते करते रहे और फिर मेरी माँ ने हम दोनों को बाजार जाकर सामान लाने के लिए भेज दिया। मेरा सात साल के प्यार

मैं और वो लड़की दोनों एक साथ बाजार से सामान लेने के लिए चले गए। हम सामान लेकर अपने घर पहुंचे थे की उनके पिताजी हमें रास्ते में जाते हुए मिले तब  उन्होंने उस लड़की से कहा की कुछ दिनों तक उसे अपने दादा  के साथ हमारे घर रहना है और उसे रोज गांव के मंदिर में लेकर जाना है। इतना कह कर वो वहा से चले गए। और हम दोनों भी वहा से अपने घर आ गए। कुछ देर बाद शाम हो गयी अब हम दोनों को ही उसके पिताजी को मंदिर लेकर जाना था। मेरा सात साल के प्यार

हम दोनों उसके दादा को लेकर मंदिर चले गए। वहा पर हम दोनों ने शाम के समय में मंदिर के ऊपर से गांव की सुंदरता का आंनद लिया। इतने में मेरे पिताजी में हमें खाने के लिए मेरे पास कॉल किया। कॉल आते ही मैं और वो लड़की वहा से उसके दादा को लेकर घर आ गए। सब ने मिलकर एक साथ खाना खाया और बाते करने लग गए। तभी उस लड़की ने कहा की उसे हमारा पूरा गांव देखना है। उसके ऐसा कहने पर मेरी माँ ने मेरा नाम लेकर कहा की मैं कल उसको हमारा पूरा गांव घुमाऊ। मेरा सात साल के प्यार

गांव मे घुमाने के बाद लड़की को हुआ लड़के से प्यार। मेरा सात साल के प्यार की कहानी | Love Story Of My Seven Years.

 

मेरा सात साल के प्यार
मेरा सात साल के प्यार

 

 

हम कुछ देर बाते करने के बाद अपने -अपने कमरे में जाकर सो गए। वो अपने दादा के साथ दूसरे कमरे में जाकर सो गयी। मैं रात में उसके बारे में ही सोच रहा था। मेरा मन उसको प्रपोज करने का कर रहा था लेकिन मैं अपने पिताजी की वजह से रुका हुआ था। कही उसने मेरे पिताजी से यह बात बोल दी तो वो मुझे डाँटेगे मैं इस बात से दर ढह था। मैं उसके बारे में सोचता -सोचता सो गया। अगले दिन हम दोनों जल्दी तैयार होकर उसके दादा जी को मंदिर लेकर चले गए। मेरा सात साल के प्यार

उसके बाद हम दोनों मंदिर से अपने घर आ गए और वहा से हम दोनों गांव के सूंदर खेतो को देखने के लिए चले गए। पुरे दिन हम दोनों गांव में घूमते रहे। फिर शाम को हमें फिर से मंदिर जाना था। तो हम जल्दी ही घर आ गए और उसके दादा जी को लेकर मंदिर चले गए। कुछ समय मंदिर में रुके और फिर घर आ गए। मैं ने खाना खाया और अपने घर की छत पर घूमने के लिए चला आया। उस समय भी मैं उस लड़की के बारे में ही सोच रहा था लेकिन डर भी रहा था। मेरा सात साल के प्यार

कुछ समय बाद वो लड़की भी खाना खाकर अपने दादा को सुला कर मेरे पास छत पर आ गयी और कहने लगी की आज उसे नींद नहीं आ  रही है। जब मैंने उससे कहा की घूमने की वजह से  उसे नींद अनहि आ रही है। लेकिन उसने कहा की वो थकान महसूस नहीं कर रही है। फिर मैंने उसे और बहाने बता दिए। तब उसने कहा की उसे मुझे प्यार हो गया है। उसके ऐसा कहते ही मुझे अपने कानो पर विश्वास नहीं हुआ। लेकिन उसने जब मेरा पढ़कर मुझसे फिर से वही बात कही। मेरा सात साल के प्यार

फिर मैंने उससे कहा की यदि उसके पिताजी को पता चल गया तो वो हम दोनों को बहुत डाँटेगे। लेकिन उसने कहा की ऐसा कुछ नहीं होगा। मेरी लाख मना करने के बाद उसने कहा की यदि मैंने उससे प्यार नहीं किया तो वो मर जाएगी। उसके ऐसा कहते ही मैंने उसे अपनी बाहो में भर लिया। उसने मुझे मेरे होठो पर kiss भी किया। मैंने भी उसके होठो पर काफी देर तक kiss करे।

पूरी रात वो मेरी बाहो में बैठी रही मैं भी उसके साथ हमारी छत पर बैठा रहा। सुबह हम दोनों सके दादा को लेकर मंदिर चले गए। उसने मंदिर में कहा की वो मुझसे शादी करना चाहती है। लेकिन मैंने उसे समझाया की घर वाले इसकी इजाजत नहीं देंगे। मन दोनों ने कुछ देर तक बाते करि और फिर वहा से घर आ गए। हम घर पर बैठकर बाते कर रहे थे की उसके पिताजी उन्हें ले जाने के लिए हमारे घर आ पहुंचे। मेरा सात साल के प्यार

कुछ समय बाद मेरे पिताजी भी गांव से हमारे घर आ गए। फिर वो अपना सामान पैक करने के लिए कमरे में मुझे लेकर चली गयी। उस दिन वो कमरे में मेरे लिए बहुत रोई उसने कहा की मैं हमारी शादी की बात मेरी मम्मी से करू। उस समय मैंने उसे हा भर के उसे वहा से जाने के लिए कहा उस समय उसने मुझे अपना नंबर दिया और कहा की आज के बाद हम दोनों केबल फोन से बात कर पाएंगे। उसके दूर जाने का दुःख तो मुझे भी था लेकिन उस समय मैं मजबूर था। मेरा सात साल के प्यार

वो और उसके दादा उसके पिताजी के साथ अपने घर चले गए। मैं शाम के समय में मंदिर चला गया और फिर घर आकर खाना खाया और छत पे चला गया मुझे उसकी कमी महसूस हो रही थी। तभी उसने मेरे पास फोन किया। उस रात हम दोनों ने देर रात तक बाते करी।हम  प्यार भी एक लम्बे समय तक चला। उसे जब भी मुझसे मिलने का मन करता तो वो अपने दादा को लेकर मंदिर का बहाना करके गांव आ जाती। मेरा सात साल के प्यार

फिर हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छे से वक्त बिताते। हमारा प्यार को चलते हुए सात साल हो गए है। वो मुझसे आज भी प्यार करती है। और जब भी उसका मिलने का मन करता है वो मुझसे मिलने हमारे गह आ जाती है। तो ये ही मेरे सात साल के प्यार की कहानी आप सब पसंद आयो होगी। और कहानी पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट 102generic .com से जुड़े रहे। मेरा सात साल के प्यार

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