Latest 2022 Story Of Farmer’s Son.| एक गरीब किसान ने बनाया अपने बेटे को फौजी।

Story Of Farmer’s Son.

Farmer's Son.
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यह कहानी मेरे गांव की है। जब मैं रोज एक गरीब किसान को उसके खेतो में कड़ी मेहनत करते हुए देखता। वो दिन सुबह जल्दी ही अपने खेतो के काम करने के लिए आता और देर शाम तक काम करता। जब मैं उससे पूछता की आप खेतो मे मेहनत क्यो करते हो तो वो केवल एक ही जबाव देता की उसे उसके बेटे को पढ़ा लिखा कर एक फौजी  बनाना है।

मैं जब की कोचिंग से आता तो उसे तेज धूफ में काम करते हुए देखता। वो कभी अपने खेतो की फसल में पानी डालता तो कभी अपने बैलो को नहलाता तो कभी मिट्टी की खुदाई कर के उसमे नए बीज बोता। उससे हमारे गांव में कोई भी आदमी पूछता तो उसे बस एक ही जबाव मिलता की उसको उसके बेटे को फौजी  बनाना है।Story Of Farmer’s Son.

उस किसान का नाम श्याम लाला था। उसने अपने बेटे को हमारे आस -पास के सबसे महेगे स्कूल में पढ़ने के लिए रख रखा था। मैने भी उस स्कूल में पढ़ने की बहुत कोशिश की थी लेकिन मेरे पिताजी ने मुझे उस स्कूल में पढ़ने के लिए नहीं भेजा।

उस किसान के बेटे का नाम मोहन था। मोहन पढाई में इतना अच्छा था की हमारे आस -पास के गांव में उस लड़के के चर्चे थे। हमारे गांव के सभी लोग मोहन को बहुत एक अच्छा लड़का मानते थे।  मैं भी मोहन का अच्छा दोस्त था। मुझे पढाई में कोई भी दिक्कत होती तो मैं मोहन के पास जाकर उसका हल निकलवाता।

मोहन केवल पढ़ाई के अलावा और फालतू किसी भी चीजों पर ध्यान नहीं देता था। वो भी अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन रात पढ़ाई करता। हमारे गांव में पढाई सम्बंधित कई प्रतियोगिता की जाती थी।  जिसमे मोहन भी भाग लेता था। उसने एक भी ऐसी प्रतियोगिता नहीं छोड़ी जिसको उसे जीती न हो। हर साल मोहन ही सभी प्रतियोगिताओ में विजेता रहता था।Story Of Farmer’s Son.

मोहन का वचपन से पढ़ाई में अच्छा मन था। वह किसान अपने गांव के लोगो के द्वारा उसके बेटे की पढ़ाई के बारे में तारीफे सुनता तो वो भी बहुत खुश होता। उसका कहना था उसके पिताजी गरीब होने के कारण उसको  पढ़ाई नहीं करवा पाए। लेकिन मैं कैसे भी करके अपने बेटे की पूरी पढ़ाई करवा कर कैसे भी करके उसको फौजी बनाऊगा।

उसके स्कूल भी उसके गुरूजी उसकी पढ़ाई के बारे में खूब बाते करते थे।उसके दिमाग की इतनी तारीफे सुनने के बाद कई कंपनियों ने उसको अपने लिए काम करने के कई ऑफर दिए लेकिन उसने उन सब कंपनियों  के वहा जाने के लिए उसने मना कर दिया।Story Of Farmer’s Son.

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जैसे -जैसे समय निकलता गया मोहन पढाई में उतना ही काबिल बनता गया। वो अब इतना काबिल हो गया था की किसी भी सरकारी नौकरी के लिए तैयार था। बस अब बारी थी उसको अपने ज्ञान को और भी अधिक विकसित करने की।

उसके लिए उसको शहर जाकर कुछ दिनों के लिए कोचिंग करनी पड़ेगी इसके लिए उसको काफी पैसो की भी जरुरत पड़ी थी। लेकिन उसके पिताजी ने पहले ही समझदारी से काम लेकर दिन -रात एक करके उतने पैसे जमा कर लिए थे की मोहन की आगे की पढाई में कोई रुकाबट न आये। क्योकि की आज के जमाने में बिना पैसो के कुछ भी काम संभब नहीं है।Story Of Farmer’s Son.

दिन रात मेहनत करके किसान के बेटे ने की फौजी की परीक्षा पास -एक गरीब किसान ने बनाया अपने बेटे को फौजी | Story Of Farmer’s Son.

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मैं भी उसके साथ पढ़ाई करने के लिए शहर आया था। लेकिन हम दोनों एक साथ शहर आये थे लेकिन वो अगल कोचिंग में पढ़ने के लिए गया और मैं दूसरी कोचिंग में पढ़ने के लिए चला गया। हालांकि मैं उसको अपनी गली में होकर कोचिंग जाते हुए अकसर देखा करता था।

उसके पिताजी दिन -रात मेहनत करते और उसको पैसे भेजते। कई -कई बार तो दूसरे लोगो केक पास पैसो में काम करने के लिए भी जाते। उसके पिताजी इतने मेहनती थे की उसकी मेहनत के किस्से में अपने पिताजी से बाते करते समय सुनता था। मुझे भी मेरे पिताजी उसकी तरह मेहनत करने को बोलते थे।

उसकी कोचिन के लड़के भी उसके कुछ ही दिनों में दोस्त बन गए। मेरे मकान मालिक के लड़के भी उसकी कोचिंग में पढ़ने के लिए जाते थे। वे भी उसके दोस्त थे। जो पढाई के बाद घर आने पर उसकी मेरे सामने खूब तारीफ करते। Story Of Farmer’s Son.

उनका कहना था की मोहन को केवल अपनी पढाई से मतलब है ये लड़का किसी दिन अपना नाम बनाएगा। मोहन उस समय किसी लड़की से बोलता भी नहीं था बस पढ़ाई करने के लिए आता और पढाई के बाद वहा से चला जाता।

जैसे -जैसे हमारी कोचिंग पूरी होती गयी वैसे -वैसे मोहन ने अपनी पढाई में समय देना शुरू कर दिया। फिर एक सरकार की और से फौजी की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुआ। जिसको पढ़कर हम सब खुश हुए। Story Of Farmer’s Son.

अगले महीने पुलिस की परीक्षा लड़नी थी। मोहन उस समय कुछ दिनों के लिए गांव चला गया। मैं भी उसके साथ गांव चला आया। गांव जाते समय उसने अपने पिताजी को किसी दूसरे सेठ के यह काम करते हुए देख लिया लिया। उसके पिताजी को काम करते हुए देखते ही उसकी  आखों में आंसू आ गए।

मुझे भी यह सब कुछ देखकर बहुत बुरा लगा। मैने भी उस समय पढ़ाई में और अधिक मेहनत करने की सोची। दुनिया में गरीबी बहुत बुरी होती है। वो किसी आदमी को अच्छे से जीने भी नहीं देती है। Story Of Farmer’s Son.

उस समय हम वहा से अपने घर चले गए। शाम के समय में जब मैं मंदिर जा रहा था तो मैं उसके घर के पास से होकर गुजर रहा था तभी मुझे उस समय मोहन की के पिताजी की आवाज सुनाई दी। मैं उसकी आवाज को सुनकर वहा कुछ रुका तब मैने सुना की मोहन उसके पिताजी को यह सब करने की मना कर रहा है।

लेकिन उसके पिताजी बता रहे थे की यदि वह काम नहीं करेगा तो वो अपने घर का खर्चा कैसे चलाएगा। और फिर वो हर महीने मोहन को पैसे भी भेजता है।

मैं उनकी यह बातो को सुनकर मंदिर चला गया तभी मैने मंदिर में जाकर भगवान से प्रार्थना की ,की हर किसी हो मोहन के पिताजी जैसा पिता मिले जो दिन रात मेहनत करके अपने बेटे  भविष्य बनाये।

अगले दिन हम दोनों पढ़ाई के लिए शहर आ गए। उस समय हमारी पढाई के कुछ ही दिन बचे थे। मोहन ने उस समय कोचिंग आना बंद कर दिया था। वो अपने कमरे पर ही दिन -रात मेहनत करता रहा। Story Of Farmer’s Son.

अगले  दिन हमारी फौजी की परीक्षा लगनी थी। उस समय मैं रात को जल्दी सो गया ताकि दिन में परीक्षा के समय मुझे मुझे नींद न आये।

मैं जल्दी उठा और नहा धोकर परीक्षा के लिए तैयार होकर चला गया। मोहन भी उस समय परीक्षा के चला गया। परीक्षा के समय मैने भी खूब अच्छे से परीक्षा दी।

परीक्षा देकर मैं अपने कमरे पर आ गया लेकिन मोहन सीधा गांव पहुंच गया। मैं भी अगले दिन सुबह अपने गांव चला गया। उस दिन हम दोनों ने परीक्षा के बारे खूब सारी बाते करी। Story Of Farmer’s Son.

एक महीने बाद इस परीक्षा का परिणाम आने वाला था। मोहन भी अपने पिता के साथ खेलो में काम करने के लिए जाता और वहा पर पुरे दिन काम करता और शाम की थककर चला आता। धीरे धीरे समय निकलता गया।

फिर अगले दिन दिन शाम को अचनाक से हमारी पुलिस की परीक्षा के परिणाम घोषित हुए। मैने सबसे पहले मोहन का रिजल्ट देखा। उस समय हमारे पुरे जिले में किसी भी लड़के के उतने नम्बर नहीं आये थे जितने मोहन के आये थे।

मोहन ने इस परीक्षा में पहली रैंक प्राप्त की थी। उसक परिणाम देखकर मेरे घर वाले भी बहुत खुस हुए थे।मैं उस समय अपनी ख़ुशी बाटने के लिए मोहन के घर चला गया उस समय हमारे गांव के काफी सारे लोग वह पर मौजूद थे। Story Of Farmer’s Son.

उस समय मोहन और उसके पिताजी की आखो में आंसू थे। आखिरकार उसके पिताजी ने जो सपना देखता देखता मोहन ने उसको आज सच में बदल दिया।

मोहन के सभी घर वाले उस समय खुश थे। अगले महीने मोहन को फौजी की जॉयनिंग मिल गयी। वो वहा से शहर चला गया मुझे भी पुलिस की छोटी रैंक मिली थी। तो मैं भी शहर चला आया। अब उसके पिताजी को दूसरे के खेतो में काम करने की कोई जरुरत नहीं होती है। उसके पिताजी और मोहन  बहुत खुश थे।

मोहन शहर में ईमानदारी से एक ऑफ़िसर की अच्छे से ड्यूटी निभा रहा था। तो ये थी दोस्तों एक गरीब किस के बेटे की कहानी की किस तरीके से उसने अपने पिताजी का सपना पूरा किया। Story Of Farmer’s Son.

आप भी यदि मोहन की तरह अपने पिताजी का सपना पूरा करना चाहते हो तो उसकी तरह आप को भी दिन -रात एक करनी होगी। जिस तरह उसके पिताजी ने खेतो में और मोहन ने पढ़ाई में। उम्मीद आप सब को यह कहानी बहुत पसंद आयी होगी।

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